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Monday, 12 June 2017

Beautiful Kitchen Idea for Dream Home (III)


Beautiful Kitchen Idea for Dream Home (II)


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Beautiful Kitchen Idea for Dream Home (I)


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‘स्लर्रप फार्म’ : छोटे बच्चों की सेहत के लिये दो दोस्तों की कोशिश


उन दोनों की पहली मुलाकात लंदन में हुई थी और इसके बाद दोनों की दोस्ती इतनी गहरी हुई की आज वो मिलकर कारोबार कर रही हैं। कारोबार भी ऐसा जो बच्चों की सेहत से जुड़ा है। शौरवी मलिक (Shauravi Malik) और मेघना नारायण (Meghana Narayan) ने पिछले साल ‘स्लर्रप फार्म’ (Slurrp Farm) की शुरूआत की है। जो बच्चों के लिये पौष्टिक कुकीज (nutritious cookies) और दूसरे खाद्य पदार्थ बनाने का काम करता है। दोनों दोस्तों के ये ख्याल तब आया जब उनके बच्चे हुए और बाजार में उनको पौष्टिक कुकीज (nutritious cookies) मिलने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ‘स्लर्रप फार्म’ के कुकीज (cookies) दिल्ली (Delhi) के 50 बड़े स्टोर के अलावा ऑनलाइन ऑर्डर कर देश में कहीं भी मंगाये जा सकते हैं।
दिल्ली (Delhi) की रहने वाली शौरवी मलिक (Shauravi Malik) और मेघना नारायण (Meghana Narayan) ने साल 2016 में अपनी कंपनी ‘स्लर्रप फार्म’ (Slurrp Farm) की शुरूआत की। इस कंपनी को शुरू करने से पहले दोनों लंदन (London) में रहती थीं। यहां पर इन दोनों की मुलाकात एक कॉमन दोस्त के जरिये हुई। जिसके बाद दोनों गहरी दोस्त बन गई। 
लंदन में रहने के दौरान जब भी शौरवी भारत आतीं तो उनके जानने वाले उनसे वहां से कुकीज और खाने का दूसरा सामान मंगवाते थे। ऐसे में कई बार उनके लिये समान लाना मुश्किल हो जाता था। जब शौरवी ने ये जानने की कोशिश की कि लंदन में मिलने वाली कुकीज में क्या मिलाया जाता है, तो उनको ये जानकर आश्चर्य हुआ कि कुकीज में जो भी अनाज और दूसरी चीजें इस्तेमाल की जाती हैं वो सब भारत से ही वहां मंगाई जाती हैं, लेकिन तब ये बात आई गई हो गई और कुछ वक्त बाद दोनों भारत लौट आईं।

भारत वापस आने के बाद जब शौरवी और मेघना के बच्चे हुए तो उन्होने महसूस किया कि यहां मिलने वाले ज्यादातर कुकीज और बच्चों के खाने के सामान में मैदा, चीनी और डालडा होता है। जो कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। शौरवी ने इंडिया मंत्रा (India Mantra) को बताया कि

मैं खुद खाना बनाने की बहुत शौकिन रही हूं। बचपन में मैं देखा करती थी कि हमारी मां और दादी घर पर ही कुकीज (cookies) और दूसरे सामान बनाती थी। जो बेसन, आटा, बाजरा और दूसरे मोटे अनाजों में शहद, गुड़, घी और मक्खन डालकर बनाये जाते थे। जबकि आज की युवा पीढ़ी में माता-पिता दोनों कामकाजी होते हैं। इसलिये उनके पास इतना वक्त नहीं होता कि वो अपने बच्चों के लिए घर पर कुछ बनायें। यहीं से ही शौरवी को कुकीज (cookies) और दूसरे उत्पाद बनाने का आइडिया आया।
अपने इस आइडिया पर उन्होने मेघना से बात की और ‘स्लर्रप फार्म’ (Slurrp Farm) में कुकीज बनाना शुरू किया। हालांकि शौरवी और मेघना को कुकीज के कारोबार का कोई अनुभव नहीं था इसलिये उन्होने इस काम को एक नौसिखिए की तरह शुरू किया। शौरवी मानती हैं कि घर में कुकीज बनाना और फैक्ट्री में कुकीज बनाने में काफी फर्क है। बावजूद शौरवी इस अनुभव को अपने लिए अच्छा मानती हैं, क्योंकि इससे उनको हर कदम पर अपने उत्पाद को बेहतर बनाने की प्रेरणा मिली।
उन्होने हर स्तर पर अपने उत्पाद की गुणवत्ता का ध्यान रखा है। खास बात ये है कि मेघना और शौरवी दोनों अलग-अलग बैकग्राउंड से आते हैं। जहां शौरवी ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए (MBA from Harvard Business School) किया है, तो मेघना ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कम्प्यूटर साइंस (Computer Science from Oxford University) में बीटेक किया है।

कुकीज को बाजार में उतारने से पहले साल 2013 से दोनों कुकीज के ऊपर रिसर्च करने में जुट गई। इसके लिए देश भर के सौ से भी ज्यादा कुकीज की फैक्ट्रियों में वो दोनों गये और उनके उत्पादों और उसे बनाने के तरीके सीखे। साथ ही उन्होने स्कूलों में जाकर बच्चों के बीच अपने तैयार किये कुकीज बांटे और उनसे प्रतिक्रिया लेकर कुकीज को और बेहतर बनाने की कोशिश की। शौरवी बताती हैं कि इस दौरान कई बार ऐसा लगता था कि जैसे वो इस फील्ड में पीएचडी कर रही हैं।

अपने उत्पाद की बिक्री के लिये वो ऑनलाइन लोगों के सवालों के जवाब देती हैं। दोनों दोस्तों का मानना है कि ऑनलाइन प्लेटफार्म वो जरिया है जिससे वो देशभर में अपने उत्पाद पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा इनकी सबसे ज्यादा कोशिश उन मांओं तक अपनी पहुंच बनाने की है जो ये समझती हैं कि ‘स्लर्रप फार्म’ (Slurrp Farm) के उत्पाद केवल छोटे बच्चों के लिये हैं। जबकि इन उत्पादों की मदद से पेन केक और चिल्ला जैसी दूसरी चीजें भी बनाई जा सकती हैं या फिर आटे में मिलाकर रोटी को और पौष्टिक बनाया जा सकता है। शौरवी कहती हैं कि बड़ी कंपनियों के पास अपना मार्केटिंग बजट होता है लेकिन उनके पास फंड की कमी है। इस कारण वो सोशल मीडिया के जरिये लोगों को अपने उत्पादों और उसके उपयोग के बारे में जानकारी देती हैं।

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बच्चों के बीच ‘स्लर्रप फार्म’ (Slurrp Farm) को लोकप्रिय बनाने के लिए कुकीज के ऊपर अलग-अलग जानवरों के डिजाइन बनाये गये हैं। जैसे गैंडा, हाथी, मगरमच्छ, बाघ, शेर, तोता, बंदर आदि। अपने इन उत्पादों को वो अमेजन, बिग बॉस्केट जैसी वेबसाइट के जरिये बेच रही हैं। साथ ही दिल्ली के करीब 50 स्टोरो में ‘स्लर्रप फार्म’ (Slurrp Farm) के उत्पाद बिक्री के लिये मौजूद हैं। इनके तीन फ्लेवर के कुकीज हैं जिसमें चॉकलेट फ्लेवर के गेहूं, रागी के बिस्किट, मक्का, चावल और आम के फ्लेवर के कुकीज और केले, दूध और अनाज से बने कुकीज शामिल हैं। ‘स्लर्रप फार्म’ ने छोटे बच्चों के हाल ही में तीन नये फ्लेवर में सेरिअल लांच  किये हैं।
इसमें एक है रागी जिसमें सेब और केला मिलाया गया है। दूसरा खिचड़ी की तरह है जिसमें चावल, मूंग दाल और गेहूं है। इसमें पालक और टमाटर का फ्लेवर है। तीसरा मक्का और चावल का मिश्रण है जिसमें आम और केले का फ्लेवर है। साथ ही बाजार में कुकीज और सेरिअल (CEREALS)  लांच करने के बाद शौरवी और मेघना बच्चों की कहानी की किताबों पर भी काम कर रही हैं। जिसमें हेल्दी खाने के बारे में छोटे बच्चों को बताया जायेगा।
 शौरवी का मानना है कि अगर हमें बच्चों में हेल्दी खाना खाने की आदत डालनी है तो इसकी शुरूआत बचपन से ही करनी होगी। इस आदत को हम मजे-मजे में उनको समझाना चाहते हैं कि क्यों उनके लिए संतुलित और हेल्दी खाना जरूरी है।


आज के बच्चे ही कल का भविष्य हैं अगर उनकी इस आदत में सुधार होता है तो वो काफी बीमारियों की चपेट में आने से बच जायेंगे। शौरवी के मुताबिक पिछले 4 दशकों के दौरान हमारी खान पान की आदतें बदली हैं। पहले गेहूं चावल के साथ मोटा अनाज और दूसरे खाने के उत्पाद भी इस्तेमाल किये जाते थे। जबकि आज के काफी बच्चे इन अनाजों के बारे में जानते भी नहीं हैं। साथ ही आज की मां अपने बच्चों को बाजार में मिलने वाले डिब्बा बंद खाना खिलाने में थोड़ा हिचकती हैं। ‘स्लर्रप फार्म’ (Slurrp Farm) ऐसी मांओं की दिक्कतों को समझते हुए उन्हें पूर्ण रूप से ऑर्गेनिग और शुद्ध सामान उपलब्ध कराती हैं। ताकि उनके बच्चे बिना प्रोसेस किये हुए अनाज के उत्पाद खा सके।

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आज की युवा पीढ़ी हेल्दी खाना तो चाहते हैं लेकिन इन कामों को करने के लिए उनके पास समय भी नहीं है। जैसे पहले बाजार में इडली और डोसा का पेस्ट नहीं मिलता था लेकिन जब से ये बाजार में आसानी से मिल जाता है बहुत से युवा लोग इसका  इस्तेमाल कर रहे हैं। ठीक इसी तरह ‘स्लर्रप फार्म’ (Slurrp Farm) भी बाजार में रेडीमेड उत्पाद लांच कर रही है। इसमें उन्होने चुकंदर और पालक जैसी पौष्टिक सब्जियों का इस्तेमाल किया है। इनकी योजना अगले कुछ महीनों में तीन तरह के पेन केक और डोसा पेस्ट बाजार में लांच करने की है। डोसा पेस्ट को उन्होने पालक और चुकंदर फ्लेवर में बाजार में उतारने का सोचा है, जबकि चुकंदर फ्लेवर का डोसा 5 अनाजों को मिलाकर तैयार किया जाएगा।



Never Give Up - जीवन में कभी हार मत मानों



इस दुनिया (world) में अरबों लोग हैं और सभी सफलता (success) प्राप्त करना चाहते हैं। बहुत से लोग ऐसे हैं जो सफलता के लिए शुरुआत (starting for success) ही नहीं करते लेकिन करोड़ों लोग ऐसे भी हैं जो सफलता को प्राप्त करने के लिए शुरुआत तो कर देते हैं लेकिन सफलता के रास्ते में केवल दो कदम रखते ही जब एक छोटी सी problem सामने आ जाती है और अपना सीना तान लेती है तो कुछ लोग डर जाते हैं।

किन आपको शायद पता होगा कि सफलता के रास्ते (way of success) में यह जो सबसे पहली समस्या आपके सामने खड़ी होती है, वहीँ से सफलता की शुरुआत होती है और वहीँ से असफलता (failure) की भी शुरुआत होती है। यह निर्णय (decision) हमारा है कि हम किसे चुनते हैं।

आप बताइये कि आप किसे चुनेंगे? जी हाँ! आपने सही कहा….. आप सफलता की शुरुआत करेंगे और समस्या को कुचलकर आगे बढ़ जायेंगे।

लेकिन बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो इस प्रॉब्लम से डर जाते हैं, डर के कारण वह अपने कदम पीछे खींच लेते हैं और unsuccessful हो जाते हैं। लेकिन आपको ऐसा नहीं करना है, आपको तो लगातार (continuous) सफलता के मार्ग पर चलते रहना है और अगर कोई problem सामने आये तो उसे मार भागना है…… कुछ भी हो, समस्या को जड़ से उखाड़कर फेंकते जाना है लेकिन हार नहीं मानना (never give up) है।

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आइये अब मैं आपको एक खेल के मैदान के बारे बताता हूँ जिसमे आप हमेशा खड़े हुए हैं और तब से खड़े हुए हैं जब से आप इस दुनिया में आये हैं और तब तक खड़े रहेंगे जब तक आप चाहेंगे। यह दुनिया एक खेल का मैदान ही तो है और आप इसके एक खिलाड़ी हैं। अब जब आप खिलाड़ी हैं तो आपको जीतना है और जीतने के लिए आपको खेलना होगा।

तो देर किस बात की है….. शुरू हो जाओ और जीवन के इस मैदान में खेलना शुरू कर दो और तब तक खेलो जब तक जीत न जाओ। इस दुनिया के करोड़ो खिलाड़ी कभी किसी समस्या की वजह से तो कभी किसी असफलता की वजह से मैदान तक छोड़ देते हैं। लेकिन आपको ऐसा नहीं करना है (never quit)। आपको लगातार मैदान में डटे रहना है। और यदि आप जीवन के मैदान (life arena) में डटे रहेंगे तो कोई भी आपको हरा नहीं सकता क्योकि जब तक आप मैदान में रहेंगे, हारे हुए नहीं माने जायेंगे।

यदि आप जीवन के इस मैदान में यदि एक बार फिसल भी जाओ तो कोई फर्क नहीं पड़ता क्योकि आप मैदान में हैं…… उठिये और फिर से शुरू हो जाइये। अगर दूसरी बार गिर जाओ तो एक बार फिर उठिये …… तीसरी बार गिर जाओ तो एक बार फिर से उठ जाइये, और तब तक मैदान में डटे रहिये (never quit life’s game) जब तक success हासिल न हो जाये।

दोस्तों! सफलता एक मोती की तरह होती है जिसे पाने के लिए समुंदर में गोता लगाना पड़ता है और गहराई में जाकर मोती के लिए प्रयास करना पड़ता है। जरुरी नहीं कि एक बार में ही मोती मिल जाये, आपको तब तक समुंदर में गोता लगाकर उसकी गहराईयों में जाना है जब तक मोती न मिल जाये।
यदि असफल हो जाओ तो इसे एक चुनौती (challenge) के रूप में लो। क्या आपको पता है कि सफलता हमें मायूस करने नहीं आती, यह हमारे आत्मविश्वास (self confidence) को तोड़ने नहीं आती बल्कि हमें यह बताने आती है कि कुछ कमी रह गई है, वह हमें कुछ नया सिखाने आती है , आप उस कमी को हटा तो और फिर से आगे बढ़ जाओ और यह सीख लो कि दोबारा वह गलती नहीं दोहरानी है (Do not repeat that mistake again) जिसकी वजह से failure मिली।
यह बात अंदर कूट कूट कर भर लो कि हार नहीं माननी है (never give up), एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब आप विजेता (winner) बन जायेंगे और सफलता का मोती (pearls of success) आपके हाथों में होगा और जिसकी चमक से यह पूरा संसार रोशन हो रहा होगा।

आप केवल और केवल एक बात सोचो। यह सोचो कि कोई व्यक्ति जीवन में असफल क्यों होता है? सोचो! कुछ reply जरूर मिलेगा। कोई कहेगा कि सफलता के रास्ते में आने वाली समस्याओं के कारण असफलता हाथ लगती है तो कोई कहेगा कि परिस्थितियां विपरीत (opposite situations) थी, कोई भाग्य (luck) को दोष देगा तो कोई किसी अन्य कारण को दोषी ठहरायेगा।


लेकिन इनमे से कोई भी बात सही नहीं है क्योकि दुनिया की किसी भी ताकत में इतना दम नहीं है कि वह आपको हरा सके, आप तभी हारेंगे जब आप हार मान लेंगे और जब तक आप हार नहीं मानेंगे, जब तक आप मैदान में डटे रहेंगे तब तक आपके विजेता बनने की 100% संभावना हमेशा बनी रहेगी।

आप केवल और केवल एक बात सोचो। यह सोचो कि कोई व्यक्ति जीवन में असफल क्यों होता है? सोचो! कुछ reply जरूर मिलेगा। कोई कहेगा कि सफलता के रास्ते में आने वाली समस्याओं के कारण असफलता हाथ लगती है तो कोई कहेगा कि परिस्थितियां विपरीत (opposite situations) थी, कोई भाग्य (luck) को दोष देगा तो कोई किसी अन्य कारण को दोषी ठहरायेगा।

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लेकिन इनमे से कोई भी बात सही नहीं है क्योकि दुनिया की किसी भी ताकत में इतना दम नहीं है कि वह आपको हरा सके, आप तभी हारेंगे जब आप हार मान लेंगे और जब तक आप हार नहीं मानेंगे, जब तक आप मैदान में डटे रहेंगे तब तक आपके विजेता बनने की 100% संभावना हमेशा बनी रहेगी।

आप विजेता हो और सफलता आपका अधिकार है (success is your right)………. विजेता हार नहीं मानता और जो हार मान जाये, वह कभी विजेता नहीं हो सकता।


आपको पता है कि इस दुनिया में सबसे मुश्किल काम क्या है? मैं बताता हूँ……… इस दुनिया का सबसे सबसे मुश्किल काम मैदान में डटे हुए खिलाड़ी को हराना है क्योकि जब तक वह मैदान में डटा हुआ है, उसे कोई नहीं हरा सकता। ……. उसके हारने की केवल और केवल एक ही संभावना है और वो यह है कि वह खिलाडी खुद हार मान ले।

कुछ लोग कहते हैं कि इस दुनिया में चमत्कार नहीं होते …….. गलत कहते हैं …….. चमत्कार तो होते हैं ……..रोज होते हैं लेकिन यह चमत्कार केवल जादूगर ही कर पाते हैं और जादूगर वही है जो जीवन के मैदान में डटा हुआ है और जो मैदान छोड़ दे उसके जीवन में कभी कोई भी चमत्कार नहीं होता।

अतः मेरे दोस्तों! जीवन के मैदान में एक कुशल खिलाड़ी की तरह डटे रहो, हो सकता है कि कोई असफलता मिल जाये लेकिन कोई भी एक असफलता आपके जीवन को असफल नहीं बना सकती, फिर से उठिये और ऐसी छलांग भरिये कि सारी दुनिया आपकी मुट्ठी में आ जाये।

इस पंक्ति को हमेशा ध्यान रखिये और गुनगुनाते रहिये–


“लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती।”



Success in One Day - सफलता केवल एक दिन में ?



दोस्तों! आपने देखा होगा कि बहुत से लोग एक दिन में ही प्रसिद्ध (Famous) हो जाते हैं। केवल एक दिन में ही वह सभी लोगों की नजर में सफल इंसान (Successful person) के रूप में अपनी इमेज बना लेते हैं।

तब शायद आपको लगता होगा कि यह इंसान जिसे कल तक कोई जानता भी नहीं था वह एक ही दिन में इतना सफल कैसे हो गया। कुछ लोग तो ऐसे सफल लोगों के बारे में कहते है कि उनका भाग्य (Luck) बहुत अच्छा है तभी तो एक ही दिन में इतना फेमस हो गए।
ऐसे लोगों के बारे में सुनकर आज का युवा (Youth) और विद्यार्थी (Students) भी अचानक मिलने वाली सफलता में विश्वास (Believe in the sudden success) करने लगा है और अपने भाग्य पर निर्भर रहने लगा है। जबकि यह बिलकुल गलत है क्योंकि यहाँ लोग सच्चाई का केवल हिस्सा देख रहे है और दूसरे हिस्से को बिलकुल नजरअंदाज कर रहे हैं।
दूसरे शब्दों में कहें तो लोग यह तो देख रहे हैं कि कोई व्यक्ति एक ही दिन में सफल हो गया और सभी लोगों के बीच फेमस हो गया लेकिन यह नहीं देख रहे कि उस व्यक्ति के एक दिन में सफल होने के पीछे क्या कारण हैं।

चलिए मैं आपको एक Interview का Example देकर बताता हूँ–

दो लोग आपस में बात कर रहे थे। जिसमे एक व्यक्ति वह था जिसने एक दिन पहले ही ओलम्पिक में गोल्ड मैडल जीता और अचानक ही पूरी दुनिया में एक सफल व्यक्ति के रूप में आ गया। तथा दूसरा वह व्यक्ति उसका इंटरव्यू लेने आया था।

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इंटरव्यू लेते हुए उसने प्रश्न पूछा, “गोल्ड मैडल मिलते ही आपको तो रातों रात सफलता मिल गई। इस बारे में क्या कहना चाहेंगे आप?”

उस सफल व्यक्ति ने कहा, “बस यही कहना चाहूंगा कि यह रात बहुत लम्बी थी।”

इंटरव्यू लेने वाला बोला, “क्यों, ऐसा क्या था इस रात में, हमेशा की तरह केवल कुछ ही घंटों की ही तो थी।”

तब उस सफल व्यक्ति ने कहा, “नहीं! पूरे 10 साल की थी यह रात। आपको तो केवल कुछ घंटे पहले पता चला कि मैं Gold medal जीत गया हूँ।  लेकिन इस जीत (Victory) की शुरुआत 10 साल पहले हुई थी। इस जीत के लिए अपना खून पसीना बहाना मैंने 10 साल पहले शुरू कर दिया था। इस जीत को पाने का सपना (Dream) मैंने 10 साल पहले देखा था। इस जीत के लिए मेरे संघर्ष (struggle) की शुरुआत 10 साल पहले हुई थी। 10 साल के कठिन परिश्रम (Hard work) के बाद मुझे यह जीत मिली है। यह 10 साल का संघर्ष मेरे लिए किसी काली रात से कम नहीं था। इसीलिए मैं कह रहा हूँ “यह रात बहुत लम्बी थी, पूरे 10 साल लम्बी।”


दोस्तों! एक गोल्ड मैडल जीतने वाले व्यक्ति और इंटरव्यू लेने वाले व्यक्ति के बीच हुई यह बात हमें बहुत कुछ सिखाती है।

लोगों की नजरों में उस व्यक्ति ने रातों रात success हासिल की थी अर्थात उसे अचानक एक दिन में सफलता मिली थी लेकिन हकीकत यह है कि इस बेहतरीन सफलता के पीछे 10 साल का संघर्ष छिपा हुआ था, जिस पर किसी का ध्यान तक नहीं गया।

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आज के युवा लोगों को यह बात समझनी होगी कि सफलता अचानक नहीं मिलती बल्कि मिलने वाली सफलता के पीछे न जाने कितना संघर्ष छिपा हुआ होता है। (Success comes after Struggle)

जितनी बड़ी सफलता कोई व्यक्ति प्राप्त करता है और जो अचानक पूरी दुनिया में फेमस हो जाता है, उतना ही बड़ा आत्मविश्वास (Self confidence), उतनी ही ज्यादा मेहनत और उतनी ही बड़ी सुनियोजित रणनीति (Well planned strategy) उस सफलता के पीछे छिपी होती है।
अतः आज के युवा (Youth) और विद्यार्थियों (Students)को मैं यही समझाना चाहता हूँ कि सफलता अचानक कभी नहीं मिलती। उसके लिए आपको अपनी उतनी ऊर्जा (Energy) खर्च करनी ही होगी जितनी सफल होने के लिए जरुरी होती है। हो सकता है दुनिया में कुछ लोगों को एक दिन की मेहनत में ही सफलता मिल गई हो लेकिन ऐसी सफलता केवल एक दिन ही टिक पाती है।
अतः भाग्य के भरोसे मत बैठो और न यह सोचो कि सफलता रातों रात मिल सकती है (Never Believe in the sudden success), बल्कि उठो! और आज से ही अपने लक्ष्य (Goal) के लिए कमर कस लो।

दुनिया की नजरों में एक सफल व्यक्ति के रूप में तभी आओगे जब आपका फाइनल रिजल्ट आएगा लेकिन उससे पहले आपको उस positive result के लिए, उस सफलता के लिए जितनी मेहनत और संघर्ष की जरुरत होगी, वह तो आपको करनी ही पड़ेगी।